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मेरे जज्बात

मेरे जज्बात

कोई पूछे मेरे दिल से कैसे ये जहर पिया है,
मरना किसको कहते है जीते जी ये जान लिया है,
कौन किसका है ये वक्त ने बता दिया है,
सबने दुख देकर अन्दर से तोड दिया है,
ऐसा कौन सा गुनाह किया है,
अपनो ने ही पराया किया है,
अब कहने को रह ही क्या गया है,
सब कुछ तो बिखर गया है,
सबने दिल को तोड दिया है,
शायद ये मेरी अच्छाई का सिला मिला है,
किस्मत ने ऐसे कैसै खेल लिया है,
सब कुछ अन्दर ही अन्दर सह लिया है,
मन अन्दर ही अन्दर रो लिया है,
सब कुछ अकेले ही सह लिया है,
इतना कुछ मेरे दिल ने कैसै बरदाश कर लिया है,
किसी ने मेरा दर्द जान ने का प्रयास तक नही किया है,
मेरी खुशियो ने ही मुझे खुद से दूर किया है,
मुझको किसी भी राह मे वफा नही मिली है ,
हर मोड पर सिर्फ रूसवाई मिली है,
मेरे अन्दर बसी अब सिर्फ तनहाई है।
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