Custom Pages
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7']
Portfolio
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7'] [vc_separator type="transparent" position="center" up="12" down="16"]
 

बाबा का ढाबा

बाबा का ढाबा

ना सोचा था कभी ,
हालात कुछ बदलेंगे इस क़दर,
तस्वीर का रुख जो था उधर,
अब आ गया है अचानक इधर।

एक खूबसूरत हादसे ने,
ज़िंदगी को यूँ बदल दिया।
लबों के गिले-शिकवों को,
शुक्रानों से तरबतर कर दिया।

एक वक्त था जब ,
यूँ ही चल रही थी ज़िंदगी।
फिर कुछ देर के लिए ठहर गई,
करने लगी थी दिल्लगी।

ज़ालिम ने आँखों के आँसू भी,
सबको दिखा दिए।
लेकिन उन आँसुओं के सदके ही,
फिर से खुशहाल हो गई अपनी ज़िंदगी।

अब तो मुझे देश-विदेश में भी,
जान गया है हर कोई।
इक फ़रिश्ते ने किया कुछ ऐसा जादू,
कि जाग गई मेरी किस्मत सोई।

जागृत हुई मेरे मन में,
अब फिर से जीने की तमन्ना।
सुख मिल गया मुझे वह सब,
नहीं की थी जिसकी कभी कल्पना।

चाहे मैं हो गया हूँ 80 वर्ष का,
पर नहीं है कोई ठिकाना मेरे हर्ष का।
मैं भी अब चाहता हूँ,
चैन की सांस ले, खुल कर जीना।
चाहता हूँ किसी रेस्त्रां में बैठकर,
अपनी पत्नी के साथ चाय पीना।

करते हुए इज्ज़त अपनी उम्र की,
अब चाहता हूँ काम थोड़ा कम करूँ।
जब ईश्वर हुआ है मेहरबान,
तो क्यों मैं खट खट के मरूँ।

बॉस बनने का मज़ा,
थोड़ा सा मैं भी ले ही लूँ।
उम्र का अब क्या भरोसा,
बचे अरमान भी पूरे कर ही लूँ।

शुक्रिया है आप सबका,
मुझे खुशियों से कर दिया भरपूर।
दुनिया भर में कर दिया यूँ,
'बाबा का ढाबा' मशहूर।

ईश्वर का भी आभारी हूँ,
तहे दिल से मैं।
बुरी नज़र से बचाए रखना प्रभु,
बस थोड़ा सा डरता हूँ मैं।
No Comments

Post A Comment