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नवरात्री

नवरात्री

नौ दिन का तेरा सोलह सिंगार,
नौ दिन का यह हर्ष उल्लास का त्योहार,
नौ दिन का जीवन ज्योत और नवैद चढ़ावा,
नौ दिन का आनंदमय जयकारा।
नौ रूप धारण करने वाली,
तू ही ब्रह्मांड की संरक्षक, तू हैं आदि शक्ति,
जिस से ज्ञात है तेरे ऐश्वर्या का उसने कि तन मन से तेरी भक्ति।
तू वीरता और साहस की मिसाल है,
तू सर्वव्यापी है, तू ही कर्ता धरता है।
तूने अपने मातृत्व की महिमा दिखायी,
तूने जोगन को मोक्ष की प्राप्ती करवायी।
तेरे नौ रूप नौ नैतिक का ज्ञात कराते हैं,
प्रथम रूप, बैल पर सवार माँ शैलपुत्री,
कमल त्रिशूल से सुशोभित शांति का प्रतीक है।
द्वितीय रूप, माँ ब्रह्मचारिणी, वास्तविकता और त्याग का शिखर है।
तृतीय रूप, माँ चंद्रघंटा, साहस और सौम्यता का प्रतीक है।
चतुर्थी रूप, सिंह पर सवार माँ कुष्मांडा, ब्रह्मांड की निर्माता और धर्म का प्रतीक है।
पंचम रूप, कमल पर विराजमान माँ स्कंदमाता, वात्सल्य का प्रतीक है।
षष्ठी रूप, माँ कात्यायनी, सुख और शांति का प्रतीक है।
सप्तम रूप, माँ कालरात्रि, दुष्टों का संहार करने की ताकत प्रदान करती है।
अष्टम रूप, माँ महागौरी, दृढ़ता का प्रतीक है।
नवम रूप, माँ सिद्धिदात्री, ज्ञान और शांति की प्रदाता है।
जय माँ दुर्गे, तू ही पालन हारी, तू ही संरक्षक है।
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