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ना कभी प्रशंसा की तलाश में,
ना घमंड के आगाज़ में,
वह चुपचाप काम किये चले जाते हैं, 
अपनी खुद की पहचान को मिटा कर, 
अपना सब कुछ त्याग कर,
वो कोई और नहीं, वो मेरे पिता कहलाते हैं।
उनके सपने शायद ही कभी बोले जाते हैं,
वो अपना सब कुर्बान कर हमारे लिए जीते जाते हैं,
अनवरत दृष्टि के समक्ष परिवार की भलाई को ध्यान रख,
कदम बढ़ाए जाते हैं,
वो कोई और नहीं, वो मेरे पिता कहलाते हैं।
बाकी सब अपना भूल जाते हैं,
अपनी चाहतों को दफन कर सीने में,
वो बिना रुके चले जाते हैं,
वो कोई और नहीं, वो मेरे पिता कहलाते हैं।
और ज्यादातर समय उनकी स्वयं की चिंता अनकही चली जाती हैं,
वह है, एक मजबूत नींव, मेरे जीवन के सभी तूफानों के मध्य,
पकड़ने के लिए एक मजबूत हाथ, तनाव में भी संघर्षमयरत,
समय अच्छा हो या बुरा, एक सच्चा दोस्त जिसकी ओर हम रुख कर सकते हैं,
हमारे सबसे बड़े आशीर्वादों में से एक,
वो कोई और नहीं, वो मेरे पिता कहलाते हैं।
वह हमेशा से मेरे आधार स्तंभ रहे हैं,
जब मुझे पता था कि मैं गिर जाऊंगा,
मेरी ज़िंदगी का मस्तूल मजबूत और संबल,
वो कोई और नहीं; वो मेरे पिता कहलाते हैं।
उनका सख्त चेहरा, उनका नरम पक्ष, 
इतना लापरवाह और उनमुक्त, सिर्फ मेरे लिए बदलता है,
वह जानते हैं कि मेरे सपने इस जगह के लिए बहुत बड़े हैं,
उनका बच्चा जा रहा है, अपनी दौड़ शुरू करने, 
उसके लिए हैं तैयार,
वो कोई और नहीं, वो मेरे पिता कहलाते हैं।
वह जानते हैं कि मैं जहाँ भी जाऊंगा मैं सोचूंगा उनके बारे में,
उन्हें पता है कि मैं इसे अपने दम पर पूरा करने के लिए तैयार हूँ,
लेकिन फिर भी मैं रोता हूँ और वह मुझे कस कर गले लगाते हैं,
वो कोई और नहीं, वो मेरे पिता कहलाते हैं।
मजबूत बनने की कोशिश करते हैं, आँखों में आंसू मीचे,
मेरी उड़ान को देखने आकाश में सितारों के पार,
वह अपनी बच्चे को उड़ते हुए देखने के लिए आतुर हैं,
वो कोई और नहीं, वो मेरे पिता कहलाते हैं।
यह जाने का समय है, निश्चित रूप से एक रास्ता लेना है,
लेकिन अब मुझे पता है, खंभे भी टूट सकते हैं,
क्योंकि जब मैं दूर जाता हूँ,
वो अपने आंसुओ को दबाने की कोशिश में सफल हो जाते हैं,
वो कोई और नहीं, वो मेरे पिता कहलाते हैं।

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