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दामन

दामन

सच कहा है के अंधेरे में परछाईं भी साथ छोड़ जाती है,
जब मौत आती है ज़िंदगी साथ छोड़ जाती है,
मगर हम तो उन में से हैं जो न छोड़ते हैं साथ,
चाहे हो परछाई या हो मौत का हाथ।

थामते हैं दामन जब एक बार,
नहीं छोड़ते किसी का साथ,
चाहे लाख छुड़ाना चाहे कोई अपना दामन,
लेकिन कैसे छुड़ा पाएगा अपनी जिंदगी का साथ।

लाख कोशिश कर ले कोई,
ना मुमकिन हो पाएगा,
खुद बा खुद सपना बिखरता जाएगा,
जैसे मुठ्ठी से फिसलती रेत का बांध,
ख़ुशी तब्दील होगी फसाने में,
रात गुजरेगी मयखाने में।

और क्या चाहिए किसी को एक बार,
बस दो प्यार के बोल और थोड़ा सा प्यार,
मिल जाए तो बहुत खुशनसीब हैं,
ना मिले तो कौन सा प्याले से जाम खाली हो गया।

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